चंडीगढ़: आसाराम बापू और नारायण साईं से जुड़े चर्चित मामलों के मुख्य गवाह महेंद्र सिंह चावला की ओर से दायर याचिका को पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट ने निष्फल मानते हुए निपटा दिया। महेंद्र चावला का हाईकोर्ट में मांग थी कि उनकी हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में पुलिस ने अब तक पूरी जांच नहीं की है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अंतिम रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए। उन्होंने यह भी कहा था कि जांच लंबित रहने के बावजूद ट्रायल कोर्ट में उनकी गवाही कराई जा रही है, जिससे उन्हें बार-बार बयान के लिए बुलाया जा सकता है। हालांकि, सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत को बताया कि याचिका अब “इन्फ्रक्टुअस” यानी निष्फल हो चुकी है। इसके बाद माननीय जस्टिस अमन चौधरी की अदालत ने 14 मई 2026 को याचिका निपटा दी।
2015 में दर्ज हुआ था हत्या प्रयास का केस
पूरा मामला 16 मई 2015 को पानीपत सदर थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 243 से जुड़ा है। इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 लगाई गई थी। महेंद्र चावला का आरोप है कि आसाराम बापू और नारायण साई के खिलाफ मामलों में मुख्य गवाह होने के कारण उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। उन्होंने दावा किया कि उन पर जानलेवा हमला कराने के लिए शूटरों को लगाया गया। मामले में नारायण साई सहित अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। बाद में पुलिस ने कुछ आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया, लेकिन चावला का कहना है कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अधूरी छोड़ दी गई।
“पुलिस ने कई दस्तावेज रिकॉर्ड में शामिल नहीं किए”
हाईकोर्ट में दायर विस्तृत याचिका में महेंद्र चावला ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभ्यावेदन रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनाए। याचिका के अनुसार उन्होंने समय-समय पर पुलिस को कई शिकायतें और दस्तावेज दिए, लेकिन जांच एजेंसी ने उन्हें अंतिम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया, जिससे आरोपियों को फायदा पहुंच सकता है। चावला ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही है और निष्पक्ष जांच नहीं कर रही।
याचिका में कहा गया कि हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी ने 24 मई 2023 को मामले की आगे की जांच राज्य अपराध शाखा को सौंपने और एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे। डीजीपी के आदेश में कथित तौर पर कहा गया था कि:मामले की आगे की जांच विशेष जांच दल करे, जांच तय समय सीमा में पूरी की जाए, और आवश्यक कार्रवाई की जाए। महेंद्र चावला का आरोप था कि आदेश के बावजूद जांच वर्षों तक लंबित रही।
याचिका के अनुसार15 अप्रैल 2024 को जांच अधिकारी ने महेंद्र चावला का विस्तृत बयान दर्ज किया, 10 अक्टूबर 2024 को उनका पूरक बयान लिया गया, जिसमें उन्होंने अतिरिक्त दस्तावेज और सबूत भी सौंपे। चावला का कहना था कि इन दस्तावेजों के बावजूद जांच पूरी नहीं हुई और अदालत में पूरक अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं की गई।
ट्रायल कोर्ट में गवाही टालने की मांग
18 नवंबर 2025 को मामला सत्र न्यायालय भेजे जाने के बाद ट्रायल प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद अभियोजन साक्ष्य के दौरान महेंद्र चावला ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर अपनी गवाही फिलहाल स्थगित करने की मांग की।उन्होंने कहा था कि:जांच अभी भी लंबित है,आगे पूरक रिपोर्ट आ सकती है,ऐसे में अभी बयान दर्ज होने पर उन्हें दोबारा अदालत बुलाया जा सकता है।उन्होंने अदालत से कहा था कि अन्य गवाहों की गवाही पहले कर ली जाए और उनकी गवाही अंतिम रिपोर्ट आने के बाद कराई जाए।
ट्रायल कोर्ट ने एक लाइन में खारिज की अर्जी
महेंद्र चावला ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को उनकी अर्जी बिना विस्तृत कारण बताए खारिज कर दी।अदालत ने संक्षिप्त आदेश में केवल इतना कहा था कि: “गवाही स्थगित करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाता।” चावला ने इसे मनमाना और कानून के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
धारा 173(8) और 231 CrPC का दिया हवाला
याचिका में कहा गया था कि:धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत आगे की जांच संभव है, और धारा 231 सीआरपीसी (अब बीएनएसएस धारा 254) अदालत को यह अधिकार देती है कि वह किसी गवाह की जिरह या बयान बाद में करने की अनुमति दे सके।चावला ने कहा कि उनका उद्देश्य मुकदमे में देरी करना नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट ने मेरिट पर कुछ नहीं कहा
14 मई 2026 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि याचिका अब निष्फल हो चुकी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका निपटा दी।महत्वपूर्ण बात यह रही कि हाईकोर्ट ने: पुलिस जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की,ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द नहीं किया,और मामले के मेरिट पर कोई फैसला नहीं दिया। इस तरह महेंद्र चावला को हाईकोर्ट से कोई प्रत्यक्ष राहत नहीं मिल सकी।